: अपना धर्म अपना देश अपनी संस्कृति के लिए जिए मुनि सुधा सागर
Sun, Mar 2, 2025
रिपोर्टर अनिल जैन
अपना धर्म अपना देश अपनी संस्कृति के लिए जिए मुनि सुधा सागर
बहोररीवंद । मैं हूं अपने में स्वयं पूर्ण पर कि मुझ में कुछ गंध नहीं मैं अरस अरूपी अस्पर्शी पर से कुछ भी संबंध नहीं. यह जैनागम की वस्तु स्वतंत्रता का उद्घोष है आत्मा के उद्धार में स्वयं आत्मा ही कार्य कारण है परमात्मा एवं गुरु तो निमित्त मात्र हैं गुरु हमारे लिए परमात्म तत्व तक चरण चिन्ह है मार्गदर्शक हैं शुभ भाव के हेतु हैं यही शुभ भाव परंपरा से मोक्ष का कारण भी हैहमारा भारत जहां ऋषि मुनियों भगवान तीर्थंकर चक्रवर्ती सलाका पुरुष जैसे महान व्यक्तित्व के धनी ने जन्म लिया ऐसी पवित्र पुण्य धरा को छोड़कर आर्थिक दौड़ में अपने परिजनों को अनाथ जैसा छोड़कर युवा विदेश जा रहे हैं जहां धर्म की चर्चा चर्या करें मंदिर भगवान गुरु एवं तीर्थ एवं सेवा सुश्रिता का अवसर भी नहीं है हमारा जन्म इस धरा पर इसलिए हुआ था कि हम अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाकर स्वयं का जीवन जीवन बनाते पर अफसोस व्यक्तिगत मन से कह रहा हूं कि हम अपने इस कृत्य के माध्यम से अनाथ पने की जिंदगी को न्योता दे रहे हैं कर्म फल के अनुसारअब कभी तुम्हें भारतीय वसुंधरा प्राप्त नहीं होगी कूकर सूकर जैसी अनाथ बेसहारा जीवन व्यतीत करोगे तुमने माता-पिता परिजन पुरजन छोड़े हैं तैयार रहें ऐसा जीवन जीने के लिए जहां तुम्हारे सिर पर कोई हाथ रखने वाला नहीं होगा।कार्यक्रम के प्रथम चरण में वालम्हचारी प्रदीपभैया के निर्देशन मे मंदिरजी मे पूजन विधानअभिषेक एवं सामूहिक शांति धारा का आयोजन बड़ी संख्या में उपस्थित धर्म प्रेमी जनों की उपस्थिति में संपन्न किया गया तरुण काला उत्तम चंद जैन कोयला अशोक पाटनी श्रीमती सुशीला पाटनी राकेश जैन गोलाकोट पूर्व अध्यक्ष राजकुमार सिंघई अनिल जैन प्रमोद काका प्रमोद जैन चूना अनुराग जैन प्रेमचंद प्रेमी मिठ्ठू लाल जैन के एल जैन सुरेन्द्र सिंघई मनोज मोदी गोपीचंद जैन दिनेश जैन रमेश जैन प्रशांत जैन सुरेन्द्र सिंघई पुष्पेन्द्र मोदी आदि की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
: गाडरवारा नगर में निकली भव्य कलश शोभा यात्रा
Sat, Mar 1, 2025
गाडरवारा नगर में निकली भव्य कलश शोभा यात्रा
https://youtu.be/IaW4UEHiB-Q?si=TdvIrRQREI2mwburगाडरवारा l स्थानीय पलोटन गंज शक्ति धाम दरबार में धर्म की गंगा बह रही है । नगर की आस्था का प्रतीक शक्ति धाम दरबार में मां दुर्गा देवी प्राण प्रतिष्ठा एवं शतचंडी महायज्ञ अनुष्ठान संगीतमय श्रीदेवी पुराण का विशाल आयोजन शक्ति धाम परिवार द्वारा 1 मार्च से प्रारंभ होकर 7 मार्च तक किया जा रहा है प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से 6 तक मंदिर परिसर कथा स्थल पर प्रवचन कथावाचक पंडित दीनबंधु शरण शर्मा श्री धाम वृंदावन के मुखारविंद से होंगे । यज्ञ आचार्य पंडित भगवान दास जी शास्त्री इंदौर के सानिध्य में महायज्ञ अनुष्ठान किया जा रहा है ।
नगर में निकली भव्य कलश शोभा यात्रा
शक्ति धाम परिसर से धर्ममय वातावरण के साथ हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में विशाल कलश शोभा यात्रा निकाली गई जो पानी की टंकी , महावीर भवन, शक्ति चौक, शुक्रवारा बाजार, पुराना बस स्टैंड, जवाहर गंज, बड़ा सराफा, झंडाचौक,चौकी, चावड़ी होते हुए वापस शक्तिधाम मंदिर परिसर पहुची वहा पर शोभा यात्रा का समापन किया गया । शोभा यात्रा में भक्ति भाव के साथ माता रानी की आराधना में लीन होकर हजारो की संख्या में मातृशक्ति सर पर कलश लेकर श्रद्धा भाव के साथ चल रही थी ।
जगह-जगह की गई पुष्प वर्षा
नगर के प्रमुख मार्गो से वाहन पर सवार देवी मां की प्रतिमा एवं विभिन्न झांकियां के साथ निकली विंशाल कलश शोभा यात्रा का जगह-जगह धर्मप्रेमी जनों ने फूल माला चढ़ाकर, पुष्प वर्षा करते हुए श्रीफल भेंटकर अभूतपूर्व स्वागत किया इसके साथ ही कई स्थानों पर प्रसाद,शीतल पेयजल का वितरण किया गया । शुक्रवारा बाजार मार्ग पर मुस्लिम समाज द्वारा पुष्प वर्षा कर शोभा यात्रा का स्वागत किया गया ।
झांकिया रही आकर्षण का केंद्र बिंदु
जगत जननी मातारानी की शोभा यात्रा में सबसे आगे घोड़े पर सवार श्रद्धालु धर्म ध्वज लेकर चल रहे थे डी जे एवं बेंड बाजो पर युवा वर्ग उत्साह के साथ माँ जगदम्बे के जयकारे लगाते हुए नृत्य करते हुए दिखाई दिए, आदिवासी ढोल का अलग ही आकर्षण रहा, पंजाबी अखाड़े के युवाओं ने हेरत अंगेज करतब दिखाकर सभी का मनमोह लिया , शोभायात्रा वाले मार्ग पर रंगोली सजी हुई दिखाई दी, भस्म रमैया की शानदार प्रस्तुति काबिले तारीफ रही, ढोल पर घोड़े का नृत्य मनमोहक लगा, हनुमान जी की झांकी एवं भगवान भोलेनाथ की नृत्य करती हुई चलित झांकी मुख्य आकर्षण का केंद्र बिंदु रही । धार्मिक भजनों पर नृत्य करते हुए कलाकारों की शानदार प्रस्तुति प्रशंसनीय रही ।शोभायात्रा में धर्म प्रेमी जनता, जनप्रतिनिधि, गणमान्य जन, सभी वर्ग के लोग बड़ी संख्या में शामिल रहे । शक्तिधाम परिवार ने शोभा यात्रा में शामिल शहर की धर्मप्रेमी जनता के प्रति आभार जताते हुए सभी से 7 मार्च तक चलने वाले भव्य धार्मिक आयोजन में उपस्थित होने की अपील की है ।
: वीर भूमि बुंदेलखंड, संकटमोचन बालाजी हनुमान बागेश्वर धाम गढा की महिमा अपरंपार: मत्था टेकने मात्र से दूर हो जाते संकट.!!
Sat, Mar 1, 2025
वीर भूमि बुंदेलखंड, संकटमोचन बालाजी हनुमान बागेश्वर धाम गढा की महिमा अपरंपार: मत्था टेकने मात्र से दूर हो जाते संकट.!!
पंकज पाराशर छतरपुर
बुंदेलखंड के 108 जन अध्यात्मिक केन्द्रों में शुमार छतरपुर जिले का बागेश्वर धाम बालाजी हनुमान मंदिर गढा आस्था का जागृत केन्द्र हैं। 300 साल पुराने इस मंदिर का निर्माण सन् 1887 में बाबा सेतु लाल गर्ग ने कराया था। मान्यता है कि धाम की परिक्रमा करने से दुख: तकलीफों से निजात मिल जाती है। यही वजह है कि देश विदेश के श्रद्धालु बालाजी के दर्शन करने आते हैं।
मान्यता है कि बागेश्वर बालाजी धाम गढा में 40,000 शक्तियां भक्तों की निगरानी करती हैं। इस धाम में मंदिर के आसपास हनुमान जी की 46,000 सेना चारों ओर घूमती रहती है और दु:खी लोगों के मन की बात भगवान तक पहुंचाती हैं।
बागेश्वर सिद्पीठ के शास्त्री धीरेंद्र कृष्ण महाराज ने कलयुग के जागृत देवता, पिता व राजा हनुमान जी के जीवन से सीख, मानवता, वर्तमान समाज और देश को विश्वगुरु बनाने को लेकर अपने मन की बात रखी। उन्होंने कहा, कलयुग के राजा हनुमान जी हैं। जब श्रीराम परमधाम को जाने लगे तब हनुमान जी को उन्होंने राजा बनाया था। राजा के राज्य में कोई प्रजा दुखी नहीं रह सकती है। जो भी इनकी शरण में आते हैं, निश्चित रूप से एक पिता और राजा के रूप में हनुमान सबके कष्ट हरते हैं। माता-पिता की सेवा का हनुमान जी जैसा भाव सबमें आए तो जीवन का उद्धार होगा।
शास्त्री ने हनुमान जयंती कहने को गलत करार दिया। उन्होंने कहा, जयंती महापुरुषों की मनाई जाती है, जिनका जीवन पूर्ण हो चुका है। हनुमान जी तो आज भी हमारे बीच हैं। बागेश्वर धाम पर लीलाएं कर रहे हैं। मेहंदीपुर बालाजी, सारासर बालाजी में भी लीलाएं कर रहे हैं। कलयुग के जागृत देवता का जन्मोत्सव, प्रकटोत्सव मनाया जाता है।
*हनुमान जी से क्या सीख मिलती ?*
हनुमान जी ने जीवन में जो भी उपलब्धि पाई, जो भी काज किए, उसे प्रभु के चरणों में समर्पित कर दिया। उनके जीवन से यही शिक्षा मिलती है कि अपने जीवन का सबकुछ प्रभु को समर्पित करने से चारों युग में परिताप बना रहेगा।
*वैदिक परंपरा की ओर कैसे लौटेंगे ?*
कलयुग में राम नाम की महिमा है। जो भी राम नाम में डूब जाता है, धर्म की रक्षा करने वाले साधु संतों, माता-पिता और गुरु का सम्मान करता है, कलयुग में उस पर हनुमान जी की कृपा निश्चित रूप से होती है।