: श्री राधे (राधा अष्टमी पर कविता)
Sun, Aug 31, 2025
#हे_राधे
(राधा अष्टमी पर कविता)
हे राधा!आप नाम नहीं,एक अनुपम अनुभूति हो,प्रेम का ऐसा अमृतजो केवल हृदय की गहराइयों मेंउतर कर ही पिया जा सकता है। आपका पावन चरित्र,निष्कलंक, निर्मल और चिरशाश्वतजैसे यमुना के जल मेंउतरते चंद्रमा का प्रतिबिंबजो हर दृष्टि को पवित्र कर देता है। राधा,आप कृष्ण की आल्हादिनी शक्ति हो,उनके स्वर में छिपी मधुरता,उनकी बाँसुरी की गूंज,उनके नयनों की छवि,उनकी लीला का प्राण। कृष्ण के बिना राधा अधूरी,और राधा के बिना कृष्ण मौन।आप दोनों का मिलन ही प्रेम कापरम रहस्य हैजहाँ प्रेमी और प्रेयसीस्वयं को भूलकरप्रेम ही बन जाते हैं। हे राधा!आपकी कृपा दृष्टि मात्र सेअज्ञानी ज्ञानी बन जाता है,सूखा हृदय सरस हो जाता है,और अधीर आत्मा कोसंतोष की छाँव मिल जाती है। आपका कृपा कटाक्षसाधना का सबसे दुर्लभ फल हैं।जो तुम्हारी ओर एक क्षण देख ले,या आप जिस पर करुणा दृष्टि डाल देंवह जीवन भरतृषित नहीं रहता। आज के समय मेंजब प्रेम बाज़ार में बिक रहा है,और रिश्ते मुखौटों के नीचेसांसें ले रहे हैंराधा! आपकी प्रासंगिकतापहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।आप याद दिलाती होकि प्रेम का अर्थ स्वामित्व नहीं,बल्कि समर्पण है।प्रेम का अर्थ मांगना नहीं,बल्कि देना है।प्रेम का अर्थ शरीर नहीं,बल्कि आत्मा का मिलन है। आपका नाम जपनाकेवल एक आस्था नहीं,बल्कि चेतना का उद्घाटन है।"राधे राधे" कहते हीजैसे हृदय पर जमी धूल झर जाती है,मन निर्मल हो जाता है,और भीतर से कोईअनसुना संगीत बजने लगता है। आज राधा अष्टमी हैव्रज में दीपक जलते हैं,गली-गली में फूल बिखरते हैं,मंदिरों में शंख बजते हैं,और स्त्रियाँ उपवास रखकरआपको अपनी आराध्य सखी मानकरआरती करती हैं।आपके अवतरण दिवस परकदंब की छाया हरी होती है,यमुना के तट पर भक्ति उमड़ पड़ती है,हर घर से आपका नाम का संकीर्तनआकाश को गुंजित करता है। यह दिन केवल पर्व नहीं,भक्ति की पूर्णिमा है।यह दिन केवल स्मृति नहीं,प्रेम की पराकाष्ठा का उत्सव है। हे राधा!आपका नाम ही मंत्र है,आपकी करुणा ही साधना है,आपका प्रेम ही मुक्ति है। आज राधा अष्टमी परमैं यही प्रार्थना करता हूँकि हर हृदय मेंआपकी मधुरता जागे,हर रिश्ते मेंआपका निष्कलंक प्रेम बहे,हर आत्माआपके जप से प्रकाशित हो। राधे-राधेआपके बिनायह सृष्टि अधूरी है,और आपका साथहर जीवन पूर्ण। सुशील शर्मा
: सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर मे पर्वराज दशलक्षण महापर्व की धूम
Fri, Aug 29, 2025
सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर मे पर्वराज दशलक्षण महापर्व की धूम
कुण्डलपुर।सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में महासमाधिधारक संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से पर्वराज दशलक्षण महापर्व पर विविध धार्मिक आयोजनों के साथ दशलक्षण महापर्व 28 अगस्त से हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर पर्वतराज पर स्थित पूज्य बड़े बाबा मंदिर में प्रातः भक्तामर महामंडल विधान, पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांतिधारा, रिद्धिकलश, पूजन, विधान हो रहा है। विद्याभवन में प्रातः अभिषेक पूजन का कार्यक्रम , दोपहर में स्थानीय विद्याभवन में कुण्डलपुर जैन समाज के श्रावक परिवारों द्वारा दशलक्षण के 10 दिन अलग-अलग विधान का आयोजन भक्ति भावपूर्वक किया जा रहा है। उत्तम क्षमा के प्रथम दिवस प्रथम अभिषेक, शांतिधारा ,रिद्धिकलश आदि करने का सौभाग्य संभव शरद अर्हम जैन जबलपुर, डॉ हेमंत रमेश जैन अर्हम सोसायटी बड़ोदिया बांसवाड़ा, सुभाष राकेश मेहता बांसवाड़ा, सुशीला ठौरा परिवार कोटा, रजत आशीष नमन जैन बड़ोत कृतज्ञ उत्संग अखिलेश जैन फट्टा दमोह के साथ श्रद्धालु भक्तों ने प्राप्त किया। दोपहर में विद्या भवन में विधान पुन्यार्जक परिवार आशीष जैन हैप्पी कुण्डलपुर के साथ श्रद्धालु भक्तों ने सहभागिता दर्ज की। विधान ब्रह्मचारी मनोज भैया दमोह ,अनिल पुजारी जी कुण्डलपुर के द्वारा कराया जा रहा है। द्वितीय दिवस उत्तम मार्दव दिवस के दिन प्रथम अभिषेक, शांति धारा, रिद्धिकलश आदि करने का सौभाग्य मनोज धर्मेंद्र जैन सिरसागंज, संभव शरद जैन जबलपुर, कमल अतिशय अंशुल शहडोल, विनीत मोहनलाल शाह पुणे, अमर अतिशय विवान जैन दमोह ,आशीष लालचंद अनिल लुहाड़िया भिलाई के साथ श्रद्धालु भक्तों ने अभिषेक में भाग लिया। दोपहर में विद्या भवन में विधान पुन्यार्जक परिवार संतोष जैन कुण्डलपुर एवं डॉ. संदेश जैन कुण्डलपुर के साथ श्रद्धालु भक्तों ने विधान में भाग लिया।सायंंकाल में आरती पुण्यार्जक परिवार के द्वारा एवं प्रवचन ब्रह्मचारिणी दीदी कर्नाटक द्वारा हो रहे हैं। बड़े बाबा मंदिर में सायंकाल भक्तामर दीप अर्चना एवं पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय महाआरती हो रही है।
: विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में गोबर निर्मित भगवान गणपति की स्थापना
Thu, Aug 28, 2025
विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में गोबर निर्मित भगवान गणपति की स्थापना
सुसनेर/27 अगस्त, जनपद में क्षेत्र में मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के संस्थापक एवं संरक्षक गो ऋषि पूज्य दत्त शरणानंद जी महाराज के पावन सानिध्य में संचालित विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर मंगल शुभ वेला पर श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित श्री कामधेनु गुरुकुलम के बालकों एवं गो अभयारण्य में गो सेवा कर रहें समस्त ग्वाल बालों एवं गो अभयारण्य के प्रबंधन के कार्यकर्ताओं ने गो अभयारण्य में विराजित गो रक्षक हनुमान जी महाराज के मंदिर प्रांगण से शोभा यात्रा के माध्यम से आराधना सरोवर के पास गणपति मंडप में विधि विधान से पंडित श्याम जोशी जी ने मंत्रोच्चार द्वारा भगवान गणपति जी को विराजमान करवाया और अभ्यारण्य प्रबंधन,श्री कामधेनु गुरुकुलम की प्रधानाचार्य व बालकों एवं अभ्यारण्य के सभी ग्वाल ग्वालिन ने भगवान गणपति जी की पूजन एवं आरती की।