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: अच्छे संस्कार हो तो जीवन का चहुमुखी विकास संभव है आर्यिका रत्न श्री मृदुमती माताजी

Aditi News Team

Wed, Aug 7, 2024
अच्छे संस्कार हो तो जीवन का चहुमुखी विकास संभव है आर्यिका रत्न श्री मृदुमती माताजी हटा में चल रहे पावन चातुर्मास में प्रवचन मैं कहा वर्तमान समय में युवा पीढ़ी पाश्चात्य सभ्यता की चकाचौंध में अपने भारतीय संस्कारों से विमुख होती जा रही है। भारत देश में माता-पिता, मित्र, धर्म, जीवन-मूल्यों आदि का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है, जिनसे विमुखता का हमारी संस्कृति, संस्कारों और परिवारों में व्यापक असर होने लगा है। जैन धर्म जो कि अनादिकाल से चलता रहा है। इसको और आगे बढ़ाने की जरूरत है। जैन धर्म की शिक्षा देना आज की युवा पीढ़ी और छोटे बच्चों को अनिवार्य हो गया है। इससे उनमें त्याग ,तपस्या और संस्कारी होने की भावना आती है। उन्होंने कहा कि सही शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार हो तो जीवन का चहुमुखी विकास संभव है। बालक का जन्म अच्छें संस्कारों से होता है। आवश्यकता है जीवन को संस्कारवान बनाया जाए क्योंकि जब तक जीवन संस्कारित नहीं होगा तब तक वह समाज व राष्ट्र के लिए उपयोगी कैसे होगा? आज का बालक कल का भारत है, राष्ट्र का भावी निर्माता है, बालक देश की धरोहर है, जिस प्रकार धन की रक्षा के लिए सुरक्षा के अच्छे इंतजाम किए जाते हैं। ठीक उसी प्रकार बालक के जीवन की सुरक्षा करना माता पिता का प्रथम कर्तव्य होता है। इसलिए धार्मिक संस्कार अपने बच्चों को देना जरूरी है। सभी अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें और उन्हें धर्म के प्रति वफादार बनाएं। नई पीढ़ी को सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूक करने बेहद जरूरी है।

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