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: बुद्ध पर दोहे

Aditi News Team

Mon, May 12, 2025
बुद्ध पर दोहे शुद्धोधन के घर लिया, जन्म शाक्य कुल बुद्ध। अल्प मातृ सुख ही मिला, जीवन राजस शुद्ध। नाम लुंबनी ग्राम का, गौतम उनका गौत्र। सिद्धि प्राप्त जन्मे महा, शाक्य वंश के पौत्र। यशोधरा भामिनि प्रिया, राहुल शिशु नवजात। जरा मरण दुख व्यथित मन, कष्ट भरी थी रात। पल छिन में त्यागा त्वरित, राजपाठ का मोह। दिव्य ज्ञान की खोज में, घर परिवार विछोह। देवदत्त के तीर से, घायल था जब हंस। प्राणदान उसको दिया, कर कर्तव्य प्रशंस। अनगिन जप तप लीन थे, नित आहार निरोध। वैशाखी की पूर्णिमा, पाया सच्चा बोध। धम्म धर्म निर्माण कर, सिद्ध साध्य परिवेश। सारनाथ में बैठ कर, दिया प्रथम उपदेश। अष्टांगिक के मार्ग का, लिया सत्य संकल्प। पंचशील सिद्धांत में, बोधिसत्व परिकल्प। हिरणवती का शालवन, कुशीनगर की गोद। महामोक्ष धारण किया, परिनिर्वाण प्रमोद भटके तब सिद्धार्थ थे, बैठ गए तो बुद्ध। ख़ुद से ख़ुद लड़ते रहे, यह निर्णायक युद्ध। ✒️सुशील शर्मा✒️

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