कुण्डलपुर में फहराया राष्ट्रध्वज तिरंगा : स्वतंत्रता मर्यादा में रहे, स्वच्छंदता न बने — मुनि श्री समतासागर जी महाराज
Aditi News Team
Sat, Aug 15, 2026
कुण्डलपुर में फहराया राष्ट्रध्वज तिरंगा
स्वतंत्रता मर्यादा में रहे, स्वच्छंदता न बने — मुनि श्री समतासागर जी महाराज
दमोह (कुण्डलपुर) । सुप्रसिद्ध जैनक्षेत्र कुण्डलपुर बड़े बाबा की नगरी,संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज की तपस्थली में विद्या शिरोमणि पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वाद से स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर आजादी का महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनिश्री समतासागर जी महाराज, मुनि श्री पवित्रसागर जी महाराज, ऐलक श्री निश्चयसागर जी, ऐलकश्री निजानंद सागरजी,ऐलक श्री चैत्यसागर जी, ऐलक श्री अपारसागर जी,ऐलक श्री तन्मयसागर जी, ऐलक श्री आगतसागर जी, क्षुल्लक श्री भास्वत सागर जी, क्षुल्लक श्री स्वस्तिकसागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य में कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष चंद्रकुमार सराफ एवं पदाधिकारी सदस्यों , श्रद्धालुओं ने राष्ट्रीय ध्वज फहराकर नमन किया । राष्ट्रगान एवं मेरीभावना का पाठ कर राष्ट्र की एकता,अखंडता और राष्ट्रप्रेम का संकल्प लिया।
इस अवसर पर राष्ट्र के नाम संदेश देते हुए निर्यापक श्रमण मुनिश्री समतासागर जी महाराज ने स्वतंत्रता दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वतंत्रता हमारा अधिकार है, लेकिन हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हमारी स्वतंत्रता स्वच्छंदता में परिवर्तित न हो।स्वतंत्रता यदि मर्यादा में बंधी रहेगी तो वह स्वच्छंदता नहीं बनेगी। उन्होंने कहा कि लोगों को अपने अधिकार तो ज्ञात होते हैं, लेकिन वे अपने कर्तव्यों को भूल जाते हैं। यदि व्यक्ति अपने कर्तव्यों का ध्यान रखते हुए अपने अधिकारों और स्वतंत्रता को समझेगा तो उसकी स्वतंत्रता सदैव मर्यादित रहेगी।
मुनि श्री ने कहा कि बाहर से कोई हमें अनुशासित करे, यह अलग बात है,लेकिन वास्तविक जीवन की सफलता तब है जब हम स्वयं आत्म-अनुशासित बनें, स्वयं कर्तव्यनिष्ट बनें,स्वयं सेवक बनें और स्वयं भगवान के भक्त बनें। यही बड़े बाबा का संदेश है। उन्होंने कहा कि आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर महा मुनिराज ने बड़े बाबा के भव्य दर्शन को लेकर जो स्वप्न देखा था, वह जाग्रत अवस्था का स्वप्न था। जो व्यक्ति चलते-फिरते और जागते हुए अपनी भावनाओं में सपने देखता है, उसके सपने साकार होते हैं। गुरुवर ने कठिन तप-साधना और अथक पुरुषार्थ किया। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि “जो पानी से नहाता है, वह केवल अपना लिबास बदलता है, लेकिन जो पसीने से नहाता है, वह इतिहास बदलता है।” मुनि श्री ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी को गुरु-भक्ति और आत्मसाधना का संदेश देते हुए कहा कि शांत भावों से, स्थिर चित्त होकर और श्रद्धापूर्वक गुरु मंत्र का जाप करना चाहिए। उन्होंने सभी से गुरु मंत्र का 9, 27 अथवा 108 बार जाप करने का आग्रह किया। गुरु मंत्र —
“ॐ ह्रीं श्री विद्यावर्धनाय सिद्धि प्रदायक परम गुरुदेवाय नमः।”
उन्होंने कहा कि गुरु मंत्र श्रद्धा और भावपूर्वक किया गया जाप साधक के भीतर गुरु की छवि और आध्यात्मिक ऊर्जा का जागरण करता है।राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ एवं क्षेत्रीय प्रचारमंत्री जयकुमार जैन ‘जलज’ ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस के इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने राष्ट्रध्वज को नमन कर राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन तथा देश की एकता-अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। प्रातः भक्तामर महामंडल विधान, पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक ,शांतिधारा, रिद्धिकलश, पूजन हुआ। प्रथम अभिषेक शांतिधारा आदि करने का सौभाग्य श्रेष्ठी सर्वश्री पदमचंद धर्मेंद्र देवेंद्र जितेंद्र गदिया परिवार कोलकाता बेलारी रायपुर, राजकुमार अनीता सिद्धांत परिवार दिल्ली, तारादेवी संजय रेखा कन्हैयालाल गंगवाल परिवार रायपुर, संजय अभिनव जैन दिल्ली, महावीर प्रसाद राजकुमार बाकलीवाल रायपुर, सौरभ जैन तलवाड़ा बांसवाड़ा, विनीत जैन दिल्ली, अजय नितिन जैन दिल्ली, प्रदीप जी आशा बड़जात्या रायपुर, योगेश वैभव दिल्ली, सुरेशचंद दिल्ली, कमलचंद, राजेंद्र ,रूपाली पारस जैन परिवार आदि के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने बड़े बाबा का अभिषेक का सौभाग्य प्राप्त कर अपना जीवन धन्य किया। दोपहर में विद्याभवन में भक्तामर महामंडल विधान एवं मुनिसंघ के प्रवचन हुए।
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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
कुंडलपुर सिद्धक्षेत्र