गाडरवारा में बछ बारस पर माताओ ने की गाय-बछड़े की पूजा, : संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना
Aditi News Team
Wed, Sep 9, 2026
बछ बारस पर माताओ ने की गाय-बछड़े की पूजा,
संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना
गाडरवारा। भारतीय लोक परंपराओं के संवर्धन की दिशा में भादो मास की पावन द्वादशी तिथि के दिन बछ बारस का पर्व भक्ति यह पर्व विशेष रूप से राजस्थानी मारवाड़ी समाज की महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से विभिन्न स्थानों पर परंपरानुसार मनाया गया।
लोक महत्व और गौ-सेवा के बछ बारस का पावन पर्व मुख्य रूप से गौ-माता और उसके बछड़े के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अनूठा उत्सव है, । मान्यता है कि इस दिन के दूध पर केवल बछड़े का अधिकार होता है, इसलिए इस दिन गाय के दूध, दही और उससे बनी वस्तुओं का सेवन पूर्णतः वर्जित माना जाता है। इस अवसर पर माताएं अपने पुत्र और संतान की रक्षा, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए निर्जला या एक समय फलाहार कर व्रत रखती हैं। यह पर्व मातृप्रेम और मूक प्राणियों के प्रति सेवा भाव को मजबूत करता है।
पूजा की अनूठी परंपरा
बछ बारस के पावन अवसर पर महिलाये सामूहिक रूप से एकत्रित होकर साक्षात गौ-माता और बछड़े की विधि-विधान से रोली, अक्षत, मौली और पुष्प अर्पित कर पूजा-अर्चना की। गौ-माता के सींगों को सिंदूर और घी लगाया गया। इस दिन भोजन पकाने या फल-सब्जी काटने में किसी भी धारदार वस्तु (चाकू आदि) का उपयोग नहीं किया जाता । साथ ही, गेहूँ और जौं से बनी वस्तुओं का सेवन भी निषेध रहा।
पूजा के लिए एक दिन पहले ही रात्रि में मूंग, मोठ, चने और बाजरा भिगोकर रख दिए जाते हैं, जिसे स्थानीय भाषा में 'भिगोना' कहते हैं। पूजा के पश्चात् महिलाओं ने इन्हीं अंकुरित अनाजों और महुए के पत्तों पर रखकर बाजरे की रोटी व अन्य स्थानीय व्यंजनों का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण किया जाता। पूजा के अंत में बछ बारस की कथा सुनने के बाद और परिवार के बच्चों को तिलक लगाकर उनके सुखी और उज्ज्वल भविष्य की कामना की ।
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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
मारवाड़ी समाज गाडरवारा