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अब राखी केवल धागा नहीं,न रिश्तों की कोई रस्म भर है, यह उस विश्वास का नाम है, जो हर रिश्ते के साथ खड़ा है।

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राखी पर कविता निर्मला पाराशर की कलम से : अब राखी केवल धागा नहीं,न रिश्तों की कोई रस्म भर है, यह उस विश्वास का नाम है, जो हर रिश्ते के साथ खड़ा है।

Aditi News Team

Thu, Aug 27, 2026

रक्षाबंधन के नए मायने

अब राखी केवल धागा नहीं,

न रिश्तों की कोई रस्म भर है,

यह उस विश्वास का नाम है,

जो हर रिश्ते के साथ खड़ा है।

भाई की कलाई पर बंधकर

बहन सिर्फ सुरक्षा नहीं माँगती,

वह कहती है—

“मेरे सपनों की भी रक्षा करना,

मेरी उड़ान को कभी मत रोकना।”

और भाई भी अब यह समझे,

बहन कोई अबला नहीं,

उसे रक्षा की नहीं,

बराबरी और सम्मान की जरूरत है।

वह पढ़ना चाहे—तो साथ दो,

वह आगे बढ़ना चाहे—तो हाथ दो,

वह अपने फैसले खुद ले—

तो उसके विश्वास का साथ दो।

राखी का अर्थ अब इतना ही नहीं

कि भाई बहन की रक्षा करेगा,

बल्कि यह भी है—

बहन भाई की ढाल बनेगी,

और दोनों मिलकर

एक-दूसरे के सपनों की हिफाजत करेंगे।

रक्षा केवल कलाई की नहीं,

सम्मान की भी होनी चाहिए,

बहन की हँसी, उसकी आज़ादी,

उसकी पहचान सुरक्षित होनी चाहिए।

और क्यों केवल भाई-बहन?

हर वह रिश्ता राखी का हकदार है,

जहाँ मुश्किल में कोई हाथ थामे,

जहाँ आँसू में कोई साथ खड़ा हो।

इस बार राखी पर

बस इतना संकल्प करें—

न कोई बंधन सपनों पर होगा,

न कोई भेद रिश्तों में होगा,

रक्षा का अर्थ बदलना होगा,

सम्मान से रिश्ता गढ़ना होगा।

कलाई पर धागा छोटा है,

पर संदेश बहुत बड़ा—

“मैं तुम्हारी रक्षा करूँगा” से आगे बढ़कर,

“मैं तुम्हारे अधिकार, सम्मान

और सपनों के साथ खड़ा रहूँगा।”

यही रक्षाबंधन का नया अर्थ है,

यही रिश्तों की सच्ची जीत—

राखी अब केवल रक्षा नहीं,

बराबरी, विश्वास और प्रेम का गीत।

Tags :

अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

निर्मला पाराशर (लेखिका)

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