Saturday 5th of September 2026

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शिक्षक दिवस पर विशेष - श्री मति निर्मला पाराशर (शिक्षिक) की कलम से

राष्ट्रीय श्रमजीवी पत्रकार परिषद की जबलपुर संभागीय इकाई के तत्वावधान में

भारत के महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में

नर्मदा नदी किनारे एवं निचले क्षेत्रों में निवासरत नागरिकों से सतर्क रहने तथा आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील

स्कूलों में बच्चों की कम उपस्थिति और शिक्षण व्यवस्था में लापरवाही पर जताई नाराजगी, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

: छोटे तीन पहिया, चार पहिया वाहनो में ठसाठस भरकर स्कूली बच्चो की जान से खुला खिलवाड भी कर रहे,जिला प्रशासन पुलिस के अधिकारी कर्मचारी के साथ-साथ परिवहन अधिकारी भी कार्यवाही के नाम पर खाना पूर्ति कर रहे

Aditi News Team

Sun, Nov 24, 2024
भागीरथ तिवारी करेली  जिला प्रशासन पुलिस के अधिकारी कर्मचारी के साथ-साथ परिवहन अधिकारी भी खाना पूर्ति कर कबाड़ियों के साथ साथ दो पहिया चार पहिया वाहनों को नियम विरुद्ध खरीदने बालों को अभय दे रहे हैं l छोटे तीन पहिया, चार पहिया वाहनो में ठसाठस भरकर बच्चो की जान से खुला खिलवाड भी कर रहे हे l नरसिंहपुर (करेली)चार पहिया दो पहिया वाहनों के साथ साथ कबाड़ियों के साथ साथ सवारी वाहनो में ठसाठस सवारी भरकर परिवहन किया जा रहा है, सुरक्षा इंतजाम नाकाफी देखने को मिल रहे है। पूर्व में अनियंत्रित होकर वाहन दुर्घटना और पलटने की घटनाएं हो चुकी है लेकिन विभागीय तौर पर कारगर कदम नहीं उठाए जा रहे है। जिले और तहसील के क्षेत्रों में स्कूली बच्चों को स्कूल लाने और उन्हें घर छोड़ने को लेकर सुरक्षा के माकुल इंतजाम नहीं है। वही एक ऑटो में 8 से 10 बच्चों को भरकर स्कूल छोड़ा जा रहा है। ऑटो के अनियंत्रित होकर पलटने से किसी भी समय हादसा होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है। अधिकतर निजी शिक्षण संस्थाओं में नियमों को ताक पर रखकर बच्चों को ऑटो के जरिए स्कूल छोड़ा जा रहा है। स्कूलों में महंगी फीस वसूलने के बावजूद भी स्कूली छात्रों की सुरक्षा की की कोई गारंटी नहीं है। सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं जिला मुख्यालय सहित तहसील क्षेत्रों में बीते वर्षों में प्राईवेट स्कूलों की बाढ़ सी आई हुई है लेकिन इन स्कूलों में चलने वाले वाहनों की स्थिति देखकर ऐसा लगता है, की बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। इसके लिए जितना जिम्मेदार प्रशासन और विशेषकर शिक्षा विभाग है ।जब बात सुरक्षा की आती है तो बच्चों की जिन्दगी को दांव पर लगा दिया जाता है।कार्रवाई में खानापूर्ति विभागीय तौर पर नहीं उठाए जा रहे कारगर कदम से बढ़ रहे हौसले,जीपीएस सिस्टम का पता नहीं स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता बरतने की जरूरत है। जिले में संचालित होने वाले स्कूली वाहनों में जीपीएस सिस्टम तो दूर की बात वाहन चालकों की सीट से बेल्ट भी गायब नजर आते है। स्कूली वाहनों में जीपीएस सिस्टम होना बेहद जरूरी है संबंधित विभाग की कार्यवाही आखिर खानापूर्ति तक ही क्यो सीमित रहती है। देखना है कि अब ठोस कार्यवाही होती है या फिर इसी तरह लापरवाही पूर्वक बच्चो के जीवन से खिलवाड होते रहेगा ? क्या विभाग शीर्फ खेला करता रहेगा ?

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