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: नरसिंहपुर। चिनकी बराज परियोजना के नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा केरपानी में 10 नवंबर को पर्यावरण क्लियरियंस लेने के लिए लोक सुनवाई मे उठे कई सवाल

Aditi News Team

Fri, Nov 11, 2022
नरसिंहपुर। चिनकी बराज परियोजना के नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा केरपानी में 10 नवंबर को पर्यावरण क्लियरियंस लेने के लिए लोक सुनवाई रखी गई। जबकि इसके पहले ही परियोजना का 4700 करोड़ का टेंडर हो चुका है और एडवांस के रूप में कांट्रेक्टर को पचास करोड़ का भुगतान भी हो गया है । बगैर काम किए ही 50 करोड़ रूपए का भुगतान करना कई सवाल खड़े कर रहा है। उक्त संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे ने बताया कि केरपानी में आयोजित लोक जनसुनवाई में उन्होने और बड़ी संख्या में अन्य लोगों ने अधिकारियों से कई प्रश्न किए तथा आपत्तियां दर्ज कराईं किन्तु अधिकारी समुचित जवाब देने से बचते रहे। जिज्ञासाओं, आपत्तियों और प्रश्नों का उत्तर देने की वजह वे गुमराह करते रहे। अजय दुबे ने बताया कि इस परियोजना में चिनकी जो कि हिरनपुर के पास नरसिंहपुर जिले में स्थित है में एक बैराज बनना है दूसरा बोरास गांव में जो उदयपुरा के पास है। इनके बीच में पांच इंटेक वेल बनेंगे जिनसे 3000 से लेकर 5000 हॉर्स पावर की मोटर लगाकर पंप करके पाइपलाइन के द्वारा खेत तक पानी पहुंचाया जाएगा इसके संबंध में केरपानी में पर्यावरण विभाग द्वारा पोलूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा लोगों की जनसुनवाई आयोजित की गई जिसमें परियोजना के गुण दोष बताए गए। उसमें लोगों द्वारा उत्साह से भाग लेकर परियोजना की मूलभूत तथ्यों को रेखांकित किया गया इसमें कहा गया कि कोई भी परियोजना बनती है उसके लिए मूल रूप से केंद्रीय जल आयोग 2  द्वारा भारत सरकार के माध्यम से उसकी स्वीकृति मिलती है पहले एनवायरमेंटल इंपैक्ट एसेसमेंट यानी पर्यावरण का आकलन किया जाता है कि कोई नुकसान तो नहीं हो रहा उसके बाद बायोलाजीकल आकलन किया जाता है और जल की उपलब्धता का आंकलन किया जाता है उसके बाद उसको अनुमति दी जाती है शिवराज सरकार ने आनन-फानन परियोजना को जो कि पहले 12 सौ करोड़ की थी दो हजार करोड़ की हो गई और टेंडर लगते लगते अब 5000 करोड़ की हो गई है इसका टेंडर एक साउथ इंडियन फर्म ने लिया है। बोरास में और चिनकी में दो ऐसे बैराज बनाए जा रहे हैं ,बैराज मतलब ऐसे छोटे डैम जो कि नदी में बनते है उसके ऊपर गेट लगाए जाते हैं ऐसे बनाए जा रहे हैं । उनसे पानी छोड़कर इनटैक्वेल बनेगा सिंचाई विभाग द्वारा मूल रूप से ऐसी ट्यूबवेल इरीगेशन की छोटी-छोटी परियोजनाएं गांव-गांव में बनाई गई थी वह सारी परियोजना जना ठप हो गई हैं। ट्यूबवेल इरीगेशन जिसका एक ऑफिस नरसिंहपुर में अभी भी है ट्यूबवेल सिंचाई काशीखैरी में या अन्य जगह भी थी वहां जल उपभोक्ता संस्था बनाई गई थी और किसानों से पानी लेते थे वह मोटर पंप लगा था 25हॉर्सपावर से लेकर 100 हॉर्स पावर तक की मोटर डाली गई। ये सारी परियोजनाएं फेल हो गई क्योंकि कि किसानों ने बिजली नही भरा अगर यह इतनी परियोजना बन रही जिसमें 3000 से 5000 हॉर्स पावर की मोटर लगाई जा रही हैं फोन मोटर्स लगाने के बाद जब गुजर जाएंगे और उनका जो बिल आएगा उनको सुधार के लिए समस्या आएगी यह पूरी तरह से यह परियोजना फेल होने वाली है और आगे चलने वाली नहीं है। जनता के पैसे की खिलवाड़ है और जनता को भ्रमित किया जा रहा है कि आपको सिंचाई सुविधा दी जा रही यह लोगों को फसाने भ्रम जाल मात्र है यह परियोजना सफल नहीं होने वाली है। वैसे भी बरगी बांध में वैसे इतना पानी नहीं है कि पानी दे सके गर्मी के दिनों में पानी इतना कम हो जाता है ऐसी परिस्थितियों में लिफ्ट स्कीम बनाकर जनता को भ्रमित किया जा रहा है इससे से किसानों का कुछ भी भला नहीं होने वाला है।  

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