: जो छोड़ने की इच्छा रखता है उसका नाम मुमुक्षु है,आचार्य श्री समयसागर जी महाराज
Sat, Jun 22, 2024
जो छोड़ने की इच्छा रखता है उसका नाम मुमुक्षु है,आचार्य श्री समयसागर जी महाराज
कुंडलपुर दमोह ।सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य विद्या शिरोमणि पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा एक चुंबकीय तत्व है जो कि वह लोह तत्व को अपनी ओर आकर्षित करता है दोनों का संबंध हो जाता है इसी प्रकार आत्मगत कुछ ऐसे परिणाम है जिन परिणाम के माध्यम से कर्मों का भी संबंध हुआ करता है। कर्म दिखाई नहीं देते पर विश्वास का विषय बनता है ।आत्मगत परिणाम भी देखने में नहीं आते और वह कर्म भी देखने में नहीं आता किंतु उन दोनों का संबंध हो जाता है ।और यह संबंध हुआ नहीं अनादि काल से इसका संबंध है ।शरीर अंग का और जीव इन दोनों का अपने आप में संबंध अनादिकालीन है ।उस संबंध को तोड़ने के लिए यह मोक्ष पुरुषार्थ किया जा रहा है ।और जो छोड़ने की इच्छा रखता है उसका नाम मुमुक्षु ऐसा कहा है जो छोड़ने की इच्छा रखता है उसका नाम मुमुक्षु है और जो जोड़ने की इच्छा रखता उसका नाम भुभुक्षु है। भोगने की इच्छा रखता है पर वस्तु के साथ संबंध रखने की इच्छा रखता उसका नाम भुभुक्षु है। आपको क्या बनना है मुमुक्षु या भुभुक्षु जहां से आए हैं नहीं लौटेंगे तो भुभुक्षु कहलाएंगे। लौटना तो है क्लियर कट है आप रहली पटनागंज से आए कोई कोलकाता से बड़ी दूर-दूर से आए कोई सतना से ।गुरुदेव सतना गए पहली बार प्रवेश किया प्रवचन में कहा सत ना सत नहीं है नश्वर है क्षेत्र की अपेक्षा है संबंध जोड़ने द्रव्य की अपेक्षा से संबंध जोड़ दे रहा काल की अपेक्षा से संबंध जोड़ देता है। काल के साथ कैसा संबंध जोड़ता महाराज आज मेरा जन्मदिन है अवतरण दिवस है शब्द बदल गए बात वही है महाराज जन्मदिवस का निषेध करते हैं जन्म शब्द को हटाकर अवतरण दिवस काल के साथ भी संबंध जोड़ देता है और क्षेत्र के साथ भी संबंध जोड़ देता है। जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीश्यते कहा जननी अर्थात मां जन्मभूमि जहां जन्म हुआ यह दोनों स्वर्ग से भी श्रेष्ठ हैं ऐसा बोलते हैं। क्षेत्र के प्रति भी अटैचमेंट है काल के प्रति भी है द्रव्य के प्रति तो है ही। यह जो संबंध है भयानक है इसी को राग बोलते हैं किसी एक वस्तु के प्रति राग है तो निश्चित रूप से उसके प्रतिपक्ष जो तत्व हैं उसके प्रति द्वेष अपने आप सिद्ध हो जाता है। आप छाया में बैठे हैं तो छाया के प्रति राग है धूप के प्रति द्वेष है यदि धूप के प्रति द्वेष नहीं है तो छाया में क्यों बैठे हैं ।छाया के प्रति राग क्यों हैं राग है तो वहां किसी वस्तु के प्रति द्वेष है। आपको मीठा पसंद है हलवा पसंद है कड़वी चीज आपको पसंद नहीं है। कभी-कभी कड़वी चीज भी पसंद आती करेला वगैरा है प्रायः करके देख लो एक गिलास जूस पिया है लेकिन कौन सा है नीम का ।नीम इसके सेवन से रक्त शुद्ध होता है वैद्यों का कहना ।जिस प्रकार गन्ने का रस पीते हैं उसी प्रकार नीम का रस पीते पीना पड़ रहा है पीना अलग है और पीना पड़ रहा है यह अलग है ।पीने की इच्छा नहीं है बिना मन के जल्दी-जल्दी पी लेता है। लेकिन गन्ने का रस ,रस लेते हुए पीता है उसमें रस आ रहा है इसलिए जल्दी नहीं पीता है समय लगाता है। स्वाद लेता है इसी को बोलते हैं राग और द्वेष ।अपने लिए अभीष्ट वस्तु है उसके प्रति राग बिना नहीं नहीं रहता और जो अपने लिए अभीष्ट नहीं है उसके प्रति ऑटोमेटिक द्वेष हो जाता। कभी-कभी एक ही वस्तु राग का कारण है वही वस्तु द्वेष का कारण। एक ही वस्तु है कई ईष्ट के रूप में कभी अनिष्ट के रूप में काल का परिवर्तन हुआ है।
: सुप्रभात सत्संग समिति गाडरवारा ने मनाया विश्व योग दिवस
Sat, Jun 22, 2024
सुप्रभात सत्संग समिति गाडरवारा ने मनाया विश्व योग दिवस
गाडरवारा।कृषि उपज मंडी ,बीज निगम कार्यालय के सामने कई वर्षों से संचालित सुप्रभात सत्संग समिति गाडरवारा के सदस्यों ने विश्व योग दिवस पर योग, प्राणायाम, का कार्यक्रम रखा ! योग प्राणायाम में भाग लेने वाले सदस्यों में राम शंकर तिवारी, संतोष कुमार शर्मा, दिनेश कुमार नामदेव, भगवान दास चौबे ,जीवन लाल माटोलिया, मदन लाल सोनी, प्रेम नारायण कौरव, सुखराम विश्वकर्मा, ओमकार सेन, गोठल यादव, महेश साहू ,कमलेश चौकसे आदि सदस्यों ने भाग लिया योग कार्यक्रम का संचालन समिति के अध्यक्ष एवं प्रशिक्षित योग शिक्षक राधेश्याम सराठे द्वारा किया गया ज्ञातव्य हो कि समिति द्वारा नौ ग्रह वाटिका ,एवं 27 नक्षत्र वाटिका बनाई गई है जिसकी पूजन अर्चन एवं परिक्रमा करने हेतु बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन इकट्ठे होते हैं!
: मध्य प्रदेश शासन में राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने धूमधाम से मनाया अपना जन्मदिन
Fri, Jun 21, 2024
जन्मदिन पर पूज्यजनों का आशीर्वाद और अपनों का स्नेह मिलना परम सौभाग्य है - राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल।
KamarRana
उदयपुरा/रायसेन_____ शुक्रवार को उदयपुरा से भाजपा विधायक और मध्यप्रदेश सरकार में स्वास्थ्य राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल का जन्मदिन था। सामान्यतः नागरिक अपने जन्मदिन को अनूठे अंदाज में मनाते हैं, लेकिन राज्यमंत्री पटेल ने अपना जन्मदिन धर्मकाज को समर्पित कर मनाया।
जन्मदिन पर वह पूरे दिन अपने क्षेत्र के मांगरोल पुलघाट स्थित नर्मदा मैया सेवा आश्रम में रहे। राज्यमंत्री ने सुबह पहले क्षेत्र के सभी ग्राम खेड़ापति और पुजारियों को सम्मानित कर उनका आशीर्वाद ग्रहण किया। जिसके पश्चात उन्होंने आश्रम में ही रहकर अपने क्षेत्र के नागरिकों की बधाई स्वीकारी। जहां एक ओर नरेन्द्र शिवाजी पटेल की लोकप्रियता के चलते आश्रम में दोप से देर शाम तक बधाई और शुभकामनाएँ देने वालों का सिलसिला लगातार जारी रहा।
वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर भी उनके जन्मदिन की धूम बरकरार रही। सोशल मीडिया पर श्री पटेल को मुख्यमंत्री मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, सहित कई मंत्रियों, विधायकों, पदाधिकारियों, नेताओं और शुभचिंतकों ने शुभकामनाएँ दीं।
सोशल मीडिया पर मिली शुभकामनाओं पर श्री पटेल अपने हरफनमौला अंदाज में आभार प्रकट करते नजर आए। ज्ञात हो कि विगत वर्ष भी श्री पटेल ने आश्रम में विप्रजनों और ग्रामजनों के साथ रहकर जन्मदिन मनाया था।
मीडिया से संवाद करते हुए राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि - अपना जन्मदिवस हर किसी के लिए विशेष दिन होता है। इस दिन को वह या तो परिवारजनों के साथ या मित्रों के साथ मनाता है। मेरा तो हर दिन अपने क्षेत्रवासियों के लिए समर्पित है, चाहे फिर वह विशेष हो या सामान्य। और एक जनप्रतिनिधि के नाते क्षेत्र की जनता मेरा परिवार और विप्रजनों का का आशीर्वाद मेरे लिए सबसे बड़ा सौभाग्य है। इसलिए पिछले वर्ष से मैं अपना जन्मदिन आश्रम में रहकर खेड़ापति एवं पुजारियों के आशीर्वाद की छांव में क्षेत्रवासियों के बीच मनाता हूँ।
उन्होंने आगे कहा कि - हमारे तो ग्रंथ कहते हैं कि 'बिनु हरि कृपा मिले नहीं संता' तो हरि की कृपा से अगर पूज्य जनों का आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला है तो उससे भला क्यों अछूता रहूँ। क्षेत्र की जनता का मेरे ऊपर जो स्नेह है वह भी ईश्वरीय कृपा ही है। मेरी ईश्वर से यही प्रार्थना है कि जिस तरह विधानसभा परिवार के लोग निरंतर मुझे स्नेहाशीष देते हैं, मैं भी उनकी सेवा और सुविधा के कार्य सदैव करता रहूँ।