: सूर्य ग्रहण विशेष,आज के सूर्य ग्रहण का समय एवं सावधानियां
Tue, Oct 25, 2022
*॥सूर्य ग्रहण विशेष॥*
ग्रहण तिथि
कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या दिनांक 25/10/2022 मंगलवार
ग्रहण सूतक प्रारम्भ..
कार्तिक अमावस्या चतुर्दशी दिनांक 25/10/2022 वार मंगलवार प्रातः 04.42 से
ग्रहण प्रारम्भ काल
शाम - 04.42 से
ग्रहण का मध्यकाल..
शाम - 05.36 से
ग्रहण मोक्षकाल..
शाम - 06.30 तक
खगोलीय विवेचना..
चुकी यह सूर्य ग्रहण ग्रस्तास्त है अर्थात इस ग्रहण का मोक्ष सूर्य अस्त ( 05.50 ) होने के उपरांत होगा अतः इस ग्रहण का शुध्दिकरण दी. 26 को सूर्य उदय के उपरांत होगा भारत के उत्तर-पूर्वीय भाग में यह ग्रहण प्रभावी नही होगा..
ज्योतिषीय विवेचना..
वृषभ,सिंह धनु एवं मकर राशि के जातकों के लिए शुभ मेष,मिथुन,कन्या एवं कुम्भ राशि के जातकों के लिए मध्यम कर्क,तुला,वृश्चिक एवं मीन राशि के जातकों हेतु अशुभ फल रहेगा ग्रहण काल के दान एवं अन्य उपाय..*सर्व भूमिसमं दानं सर्वे ब्रह्मसमा द्विजाः।**सर्व गंगासमं तोयं ग्रहणे चंद्रसूर्ययोः॥**इन्दोर्लक्षगुणं पुण्यं रवेर्दशगुणं ततः।*
अर्थ-
1) स्नान,दान एवं श्राध्द आदिका चंद्रग्रहणमें लाख गुना पुण्य होता है और सूर्यग्रहण में 10 लाख गुना,और तीर्थ के समीप तो करोड़ों गुना फल हो जाता है.।2) सभी प्रकार के कष्टो से निवति एवं कामनापूर्ति हेतु अपने इष्ट देव के मूल मंत्र का ग्रहण काल मे जाप करने से अनंत कोटि पुण्य की प्राप्ति होती है.।3) ग्रहण से उत्पन्न कष्टो की निवृत्ति हेतु कांसे के पात्र में घी,स्वर्ण अथवा चांदी की सूर्य देव की प्रतिमा,चावल,मसूर की दाल,ऊनि कंबल, कच्ची खिचड़ी,नमक एवं गुड़ का दक्षिणा सहित ग्रहण मोक्ष के उपरांत दान करे.।
विशेष सावधानियां..
गर्भवती स्त्री,नवजात शिशु,त्वचा,नेत्र,रक्त रोग से पीड़ित ग्रहण काल मे कदापि बाहर न निकले ही भोजन का त्याग करे फल,दूध,चाय,दही का सेवन कर सकते है,खाने पीने की सूखी वस्तु एवं कच्चे भोजन में कुशा रखे बालक,गर्भवती स्त्री,रोगी,वृध्द के अतिरिक्त सभी सूतक प्रारम्भ होते सूतक प्रारम्भ होते ही किसी भी प्रकार की मूर्ति,विग्रह इत्यादि का स्पर्श न करे ।
: दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का महत्व एवं लक्ष्मी पूजन समय व विधि
Mon, Oct 24, 2022
दीपावली का पर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार भगवान राम इस दिन 14 वर्ष के वनवास के साथ अयोध्या वापस लौटे थे और इसी खुशी में आयोध्यावासियों ने दीये जलाकर उनका स्वागत किया था। एक अन्य मान्यता के अनुसार ऐसी मान्यता भी है कि दीपावली पर मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं इस कारण दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है। पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक माह की अमावस्या पर मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं, वहीं वाल्मीकि रामायण के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु संग माता लक्ष्मी का विवाह हुआ था। इस वजह से हर साल दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का महत्व है। दिवाली के त्यौहार में सबसे ज्यादा महत्व लक्ष्मी जी के पूजन का होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा विधि विधान के साथ करने से घर में सुख समृद्धि सदैव बनी रहती है और कभी भी धन की कमी नहीं होती है।आज दिवाली पर कई तरह के शुभ संयोग बन रहे हैं। 24 अकटुम्बर को दिवाली हस्त नक्षत्र और वैधृति योग में मनाई जा रही है। यह योग बहुत ही शुभ फल देने वाला और सुखमय जीवन के लिए अच्छा होता है। इसके अलावा बुध जो भगवान गणेश को समर्पित होता है तुला राशि में रहेंगे। जहां पर पहले से सूर्य और शुक्र मौजूद हैं। वहीं गुरु और शनि भी स्वयं की राशि में मौजूद रहेंगे। ऐसे में यह दिवाली बहुत ही सौभाग्य और आर्थिक संपन्नता बढ़ाने वाली रहेगी।
दिवाली 2022 तिथि और लक्ष्मी पूजन मुहूर्त
कार्तिक अमावस्या तिथि आरंभ: 24 अक्टूबर, 2022 को शाम 05 बजकर 29 मिनट से।
कार्तिक अमावस्या तिथि समाप्त: 25 अक्टूबर 2022 को शाम 04 बजकर 20 मिनट पर।अमावस्या निशिता काल: 11 बजकर 39 से 00:31 तक।कार्तिक अमावस्या सिंह लग्न का समय: रात 01:26 से 03:44 बजे।अभिजीत मुहूर्त का समय: सुबह 11:19 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक है।विजय मुहूर्त आरंभ: 24 अक्टूबर को 01:36 से 02:21 तक।
दिवाली 2022: लक्ष्मी पूजा का समय और मुहूर्त
लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त: 18:54 से 20:16 मिनट तकपूजा अवधि: 1 घंटा 21 मिनटप्रदोष काल: 17:43 से 20:16 मिनट तक
वृषभ काल: 18:54 से 20:50 मिनट तक
दिवाली 2022 महानिशिता काल मुहूर्त
लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त: 23:40 से 24:31 मिनट तकपूजा अवधि: 0 घंटे 50 मिनटमहानिशीथ काल: 23:40 से 24:31 मिनट तक
सिंह काल: 25:26:25 से 27:44:05 तक
दीपावली शुभ चौघड़िया मुहूर्त
संध्या मुहूर्त (अमृत, चर): 17:29 से 19:18 मिनट तक
रात्रि मुहूर्त (लाभ): 22:29 से 24:05 मिन तक
रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत,चल): 25:41:06 से 30:27:51
लक्ष्मी पूजन मंत्र
. ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः॥
. ॐ श्रीं श्रीयै नम:
. ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः॥
. ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥लक्ष्मी पूजा की तैयारी सांयकाल से ही शुरू की जाती है। जिसमें एक चौकी पर लक्ष्मी जी और गणेश जी की मूर्तियां इस प्रकार रखें कि लक्ष्मी जी के दायीं दिशा में गणेश रहें और उनका मुख पूर्व दिशा की ओर रहे। उनके सामने बैठकर चावलों पर कलश की स्थापना करें। वरुण के प्रतीक इस कलश पर एक नारियल लाल वस्त्र में लपेटकर इस प्रकार रखें कि केवल अग्रभाग ही दिखाई दे। दो बड़े दीपक लेकर एक में घी और दूसरे में तेल भरकर रखें। एक को मूर्तियों के चरणों में और दूसरे को चौकी की दाई तरफ रखें।चौकी पर रखे गणेश जी के सामने एक छोटा सा दीपक रखें।मूर्तियों वाली चौकी के सामने छोटी चौकी रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। कलश की ओर एक मुट्ठी चावल से वस्त्र पर नवग्रह की प्रतीक नौ ढ़ेरिया तीन लाईनों में बनाए। लंबोदन की ओर चावल की 16 ढ़ेरियां बनाए। नवग्रह और सोलह मातृका के बीच में स्वास्तिक का चिन्ह बनाए। इसके बीच में सुपारी रखें और चारों कोनों पर अक्षत की ढेरी। सबसे ऊपर बीच में ऊँ लिखें।देवी लक्ष्मी की ओर श्री का चिन्ह बनाए। गणेश जी की ओर त्रिशूल बनाए व चावल की ढेरी लगाए जो ब्रह्मा जी का प्रतीक है। सबसे नीचे अक्षत की 9 ढ़ेरियां बनाए जो मातृका की प्रतीका है। इसके अतिरिक्त बहीखाता, कलम-दवात और सिक्कों की थैली रखें। ध्यान रखें कि पूजा करते समय आपके परिवार के सदस्य आपकी बाईं ओर बैठें।इसके बाद शुभ मुहूर्त के समय जल, मौली, अबीर, चंदन, गुलाल, चावल, धूपबत्ती, गुड़, फूल, नैवेद्य आदि लेकर सबसे पहले पवित्रीकरण करें। फिर सारे दीपकों को जलाकर उन्हें नमस्कार करें। उन पर चावल छोड़ दें। पहले पुरुष और फिर बाद में स्त्रियां गणेश जी, लक्ष्मी जी और अन्य देवी-देवताओं का विधिवत षोडशोपचार पूजन, श्री सूक्त, लक्ष्मी सूक्त और पुरुष श्री सूक्त का पाठ करें और आरती उतारें।बही खातों की पूजा करने के बाद नए लिखने की शुरुआत करें। तेल के अनेक दीपक जलाकर घर के हर कमरे में, तिजोरी के पास, आंगन में और गैलरी आदि जगह पर रखें। किसी भी जगह पर अंधेरा न रहने दें। मिठाइयां, पकवान और खीर आदि का भोग लगाकर सबको प्रसाद बांटे।
पूजन विधि
पूर्व की ओर मुंह करके अपने और घरवालों पर जल के छींटे देकर पवित्रीकरण करें। तीन बार आचमन भी करें। कहें- ऊँ केशवाय नमः, ऊँ माधवाय नामः, ऊँ नारायणाय नमः।हाथ धोएं। सब पर जल के छींटे देकर पूजन सामग्री पर छिड़कें।मंत्र- ऊँ अपवित्रः पवित्रो वासर्वांवस्था गतोपिवा। यः स्मरेत पुण्डरी काक्षं स बाह्माभ्यन्तरः शुचि।।आसन शुद्धि के बाद पृथ्वी माता को गंध, अक्षत देकर जल छोड़ें और फूल जमीन पर छोड़ें। कहें- ऊँ पृथ्वी त्वयाधृता लोका देवित्वं विष्णुनाधृता। त्वं च धारयमां देवि पवित्रं कुरू चासनम्।।अब ऊँ दीपेभ्यो नमः बोलते हुए दीपक प्रज्वलित करें।गंध, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, आचमनीयम समर्पयामी कहते हुए धूप जलाएं। अब घंटी पर गंध अक्षत लगाकर घंटी बजाएं।अब भगवान गणेश, देवी लक्ष्मी और सरस्वती पर गंधी के छींटे दें। हाथ में फूल लेकर कहें- सभी देवी देवताओं को सात्विक मन वचन से प्रणाम करता हूं। मेरी आराधना स्वीकार करें। अपने माता-पिता, गुरू-ब्राह्मण और पूर्वजों को भी नमन करता हूं। फूल चढ़ा दें।पूजा संकल्प के लिए जल, अक्षत, पुष्प, सुपारी और द्रव्य आदि लेकर संकल्प करें। कहें- हे देवी लक्ष्मी, नारायण और सम्मुख विराजित देव। आज संवत 2079, याम्यायन गोल, शरद ऋतु, कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष की पुण्य तिथि अमावस्या, दिन सोमवार, चित्रा नक्षत्र, विषकुंभ योग, लग्ने, बेला में अपने पिता व पूर्वजो के पुण्य प्रताप से गोत्र, नाम, स्थान, मनशोदिष्ट कामना सिद्धि प्राप्ति के लिए स्थिर देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर का पूजन कर रहा हूं। आपकी कृपा से मेरी पूजा सफल हो।संकल्प भगवान गणपति, माता लक्ष्मी, देवता कुबेर आदि भगवान के पास छोड़ें।अब हाथ में फूल, दूर्वा आदि लेकर गणेशजी का पूजा करें। फल-फूल, दीप, धूप और गंध उन्हें अर्पित कर प्रणाम करें।पानी भरे कलश में सुपारी, दूर्वा, पुष्प डालें, आम के पत्ते लगाएं। ऊपर नारियल रख लाल कपड़ा लपेटें।लक्ष्मी प्राप्ति हेतु प्रसन्नचित्त कमलदल पर विराजित धन द्रव्य वर्षा करती महालक्ष्मी का ध्यान करें।पूजन सामग्री महालक्ष्मीजी को चढ़ाएं। उनकी पूजा करें।महालक्ष्मी को गंध और अक्षत अर्पित करें।अब देवी लक्ष्मी की आरती करें। गणेशजी व माता को पुष्प अर्पित करें। क्षमा प्रार्थना करते हुए प्रणाम करें।
लक्ष्मी की आरती-
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।।ॐ जय लक्ष्मी माताउमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।।ॐ जय लक्ष्मी मातादुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावे, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता।।ॐ जय लक्ष्मी माता
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता।।ॐ जय लक्ष्मी माताजिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता।।ॐ जय लक्ष्मी मातातुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता।।ॐ जय लक्ष्मी माताशुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता।ॐ जय लक्ष्मी माता
।। लक्ष्मी माता की जय।।
ओम (ॐ) असतो मा सद्गमय।
तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मामृतं गमय ॥
अदिति न्यूज की तरफ से आप सभी को दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
: कुण्डलपुर में भगवान महावीर का निर्वाण महोत्सव मनाया जाएगा
Sat, Oct 22, 2022
कुण्डलपुर में भगवान महावीर का निर्वाण महोत्सव मनाया जाएगाकुंडलपुर ।श्री दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में 25 अक्टूबर 2022 दिन मंगलवार को जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर वर्तमान शासन नायक भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण महोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा ।इस अवसर पर संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य पूज्य मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में प्रातः भक्तामर महामंडल विधान, पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन के साथ अत्यंत भक्ति भाव से निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा ।दोपहर में मिष्ठान वितरण एवं कुंडलपुर क्षेत्र कर्मचारियों को पोशाक का वितरण होगा। सायं काल 48 दीपों के साथ भक्तांमर पाठ एवं पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय महाआरती होगी ।इस अवसर पर कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष चंद्र कुमार सराफ महामंत्री चौधरी रूपचंद जैन ने धर्मश्रद्धालुओं से कुंडलपुर पधार कर पुण्यार्जन का अनुरोध किया है।भगवान महावीर स्वामी निर्वाण महोत्सव की पूर्व संध्या 24 अक्टूबर दिन सोमवार को रात्रि 8:30 बजे से स्थानीय वर्धमान सागर सरोवर में बड़े बाबा मंदिर के कृत्रिम मॉडल का जलावतरण किया जाएगा।23 अक्टूबर को भगवान पद्म प्रभु का जन्म एवं तप कल्याणक मनाया जाएगाकुंडलपुर ।सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में जैन धर्म के छठवे तीर्थंकर भगवान पद्मप्रभु का जन्म एवं तप कल्याणक 23 अक्टूबर 2022 दिन रविवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। इस अवसर पर मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज के सानिध्य में भक्तांमर महामंडल विधान, पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांतिधारा ,पूजन ,विधान होगा। श्री जी का पालना झुलाया जाएगा । सायंकाल भक्तांमर पाठ एवं पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय महाआरती होगी।