: राज्य सायबर पुलिस की बडी सफलता सायबर अपराधों में प्रयोग होने वाले हजारों फर्जी मोबाईल नंबर ब्लॉक
Mon, Mar 21, 2022
ग्वालियर। मध्यप्रदेश राज्य सायबर पुलिस द्वारा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री योगेश देशमुख के मार्गदर्शन में सायबर अपराधियों के विरूद्ध लगातार कार्यवाही की जा रही है। इसी कड़ी में सायबर पुलिस जोन ग्वालियर ने सायबर ठगी के एक साधारण से दिखने वाले प्रकरण में गहन तकनीकी विश्ले षण करते हुए न केवल हजारों संदिग्ध मोबाईल नंबरों का पता लगाया ए बल्कि लगभग आठ हज़ार संदिग्ध मोबाईल नंबरों को ब्लाक कराने में सफलता अर्जित की है
मध्यप्रदेश राज्य सायबर पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता ने फेसबुक पर कार का विज्ञापन देखकर कार खरीदने हेतु एक लाख 75 हजार रूपये जमा करा लिए जाने और इस प्रकार ठगी हो जाने की शिकायत वर्ष-2020 में सायबर पुलिस जोन ग्वालियर में की थी। जिस पर अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया था। विवेचना के दौरान यह पाया गया कि आरोपी ने फरियादी से मोबाईल पर बात करने के लिए जिस मोबाईल का प्रयोग किया था वह नंबर किसी नागरिक के पहचान दस्तावेजों का प्रयोग कर फर्जी तरीके से जारी किया गया था। विवेचना में फर्जी सिम जारी करने की प्रक्रिया में संलिप्त आठ आरोपियों के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही की गयी है। इसके अलावा विवेचना टीम ने आरोपीगण की तलाश में एकत्र किये गए डाटा के विश्लेषण पर पाया कि प्रकरण में प्रयुक्त मोबाईल नंबरों के उपयोगकर्ताओं ने विगत एक वर्ष की अवधि में लगभग 20 हजार मोबाईल नंबरों का प्रयोग किया है। इन नंबरों को संदिग्ध मानते हुए इन्हें जारी करने वाली विभिन्न टेलीकॉम सर्विस प्रोवाईडर कंपनियो वोडाफ़ोन आईडिया,एयरटेल, बी.एस.एन.एल. को इन नम्बरों के रिवेरिफिकेशन हेतु लेख किया गया। जिसके बाद टेलीकॉम सर्विस प्रोवाईडर कंपनियों द्वारा तत्परता से कार्यवाही करते हुए 7948 सिमों को बंद कर दिया।
इन सिमों का ब्लाक किया जाना इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि इस प्रकार की फेक सिमों का प्रयोग करके ही सायबर अपराधियों द्वारा देश के नागरिको के साथ सायबर अपराध विशेषकर ठगी की जाती है। परन्तु ठगी की शिकायत जांच पर पुलिस असली सायबर अपराधियों तक नहीं पहुँच पाती क्योंकि ये सिम निर्दोष नागरिकों के आई०डी०का प्रयोग कर प्राप्त की गयी होती है। इन सिमों के ब्लाक होने के बाद इन सिमों का प्रयोग सायबर अपराध में करना संभव नहीं हो पायेगा।
इस प्रकार ठगी के एक सामान्य प्रकरण में अनुसंधान और संदिग्ध आरोपियों के विरूद्ध कार्यवाही करने के साथ-साथ डाटा कलेक्सन तथा सूक्ष्म गहन विश्लेषण से हजारों की संख्या में संदिग्ध मोबाईल नंबरों का पता लगाने और लगभग आठ हजार फर्जी सिम नंबर ब्लॉक कराये जाने का यह संभवत पूरे देश का अपनी तरह का पहला मामला है।
: बैतूल,पांच करोड़ रूपये का अवैध मादक पदार्थ मेथाडोन ट्रक से पकड़ा
Mon, Mar 21, 2022
बैतूल ।पुलिस द्वारा साढ़े पांच करोड़ रूपये का अवैध मादक पदार्थ मेथाडोन ट्रक से पकड़ा गया बैतूल नागपुर फोरलेन पर मिलानपुर से असम से मंदसौर ले जाया जाने वाला ट्रक पकड़ा जिसमे 5 किलो मेथाडोन बरामद कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया ।
: दमोह में लोकायुक्त की कार्रवाई से तहसील में मचा हड़कंप,
Mon, Mar 21, 2022
सागर लोकायुक्त की टीम ने दमोह पहुंचकर रंग पंचमी के पहले 5000 रुपए की रिश्वत लेते हुए एक और आर आई को रंगे हाथों पकड़ा
दमोह।होली पर्व के बाद सोमवार को दमोह जिला मुख्यालय के दफ्तर खुलने के बाद ठीक से कामकाज शुरू भी नहीं हुआ था कि अचानक सागर लोकायुक्त टीम की दमोह में दस्तक की खबर से हड़कंप के हालात निर्मित हो गए। लोकायुक्त टीम ने तहसील कार्यालय में पदस्थ राजस्व निरीक्षक मणिराम गौंड को उनके सरकारी आवास पर 5000 की रिश्वत लेते हुएरंगे हाथों को पकड़ लिया। दरअसन जबलपुर नाका निवासी पंकज जैन ने लोकायुक्त एसपी सागर रामेश्वर यादव को शिकायत की थी कि उसकी भूमि सीमांकन के बदले में आर आई साव रिश्वत की मांग कर रहे है।जिसके बाद लोकायुक्त टीम ने अपना जाल फैलाकर ऑफिसर कॉलोनी स्थित सरकारी आवास से आरआई मणीराम को पकड़ने की कार्यवाही की। लोकायुक्त की इस कार्यवााही में निरीक्षक श्रीमती मंजू सिंह एवं अभिषेक वर्मा स्टाफ शामिल रहा। लोकायुक्त टीम के द्वारा आरोंपी आरआई के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 7 के तहत कार्यवाही जारी है वही रंग पंचमी के पहले रिश्वत के रंग से हाथ रंग जाने के इस हालात ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि दमोह के दफ्तरों में बिना लेनदेन के कोई काम नहीं होता यह बात अलग है कि अभी तक लोकायुक्त के जाल में सिर्फ छोटी मछलियां ही फंस रही है। जबकि अनेक दफ्तरों में रिश्वतखोरी का साम्राज्य चलाने वाले मगरमच्छों की भी कमी नहीं है।