: गाडरवारा,शतचंडी यज्ञ एवं देवी भागवत पुराण का भूमि पूजन
Wed, Dec 11, 2024
शतचंडी यज्ञ एवं देवी भागवत पुराण का भूमि पूजन
गाडरवारा नगर के प्राचीन खेड़ापति मंदिर में माता खेरापति की प्राण प्रतिष्ठा एवं शतचंडी यज्ञ देवी भागवत पुराण का आयोजन 26 जनवरी 2025 से 2 फरवरी 2025 तक गाडरवारा की धर्म प्रेमी जनता के द्वारा किया जा रहा है जिसमें नगर के सभी धार्मिक संगठनों मंदिर ट्रस्टों का सहयोग लिया जा रहा है इस हेतु चंडी यज्ञ देवी भागवत पुराण एवं नगर महारानी शीतला माता की नवीन प्रतिमा का जो दर्शन के लिए स्थापित की जा रही है का प्राण प्रतिष्ठा समारोह का भूमि पूजनशक्कर नदी प्रांगण में किया जाएगा अतः सभी नगर वासियों से अनुरोध है कि 10:00 बजे शक्कर नदी तट पर पहुंचकर पुण्य कार्य में सहभागी बने।
: निमाड़ के त्यागी एवं प्रसिद्ध संत सियाराम बाबा का निधन
Wed, Dec 11, 2024
निमाड़ छेत्र के प्रसिद्ध,सदगुरु,तपस्वी एवं मां नर्मदा के वरद पुत्र संत श्री सियाराम बाबा का देवलोक गमन,
https://youtu.be/JxpPzmMQtj8?si=iz-tdntGQ3a83UQHनिमाड़ के सदगुरु परमहंस त्यागी एवं प्रसिद्ध संत श्री सियाराम बाबा का देवलोक गमन हो गया है। बुधवार (11 दिसंबर) सुबह 6.10 बजे उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। सियाराम बाबा लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। सियाराम बाबा लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। शाम 4 बजे भट्यान तट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
मां नर्मदा जी के व हनुमान जी के थे परम भक्त
सियाराम बाबा खरगोन के नर्मदा नदी के घाट पर स्थित भट्याण आश्रम में रहते थे। वह हनुमान जी के परम भक्त थे। हमेशा रामचरिस मानस का पाठ किया करते थे। कहा जाता है कि सातवीं क्लास की शिक्षाके बाद किसी संत के संपर्क में आए। उसके बाद उन्होंने घर छोड़ दिया। फिर तपस्या के लिए हिमाचल चले गए ।
केवल 10 रुपये दान में लेते थे
कहा जाता है कि संत सियाराम बाबा दान में 10 रुपये ही लेते थे। बाबा ने समाज के लिए उद्धार के लिए कई काम किए। नर्मदा नदी की घाट के मरम्मत के लिए उन्होंने दो करोड़ 57 लाख रुपये दान किए थे।
जीवन में त्याग ऐसा की तन पर केवल लंगोट पहनते थे
कड़ाके की सर्दी हो या बारिश सियाराम बाबा के बारे में कहा जाता है कि वह एक लंगोट में रहते थे। ध्यान के दम पर उन्होंने अपने शरीर को मौसम के अनुकूल बना लिया था। वह अपना सारा काम खुद करते थे। संत सियाराम करीब 12 साल तक मौन व्रत में रहे।
: भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीराम कथा और 11 कुंडीय शिव महायज्ञ कि शुभारंभ : ग्राम पंचायत कौड़ियां
Wed, Dec 11, 2024
रिपोर्टर रजनीश कौरव
भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीराम कथा और 11 कुंडीय शिव महायज्ञ कि शुभारंभ : ग्राम पंचायत कौड़ियां
कौंड़िया। गांव में सोमवार को श्रीराम कथा एवं 11 कुंडीय महायज्ञ की शुरूआत की गई। कौंड़िया में यज्ञस्थल से कलश यात्रा के साथ शुरू हुए यज्ञ के प्रथम दिन आचार्यो ने विधि-विधान से कलश पूजन कराकर कलश यात्रा निकलवाई। यात्रा यज्ञस्थल से निकाल कर प्राचीन झरना नर्मदा कुंड पहुंची। जहां पर जल का पूजन अर्चन किया गया। नर्मदा मैया, भगवान शंकर, हनुमान जी महाराज, श्रीराम-जानकी की पूजा की गई। समस्त देवी देवताओं के मंदिरों पर धर्मध्वज एवं श्रीफ ल भेंट कर पूजन हुआ। झरनाकुंड से यात्रा निकालते हुए बाजार मोहल्ला, शिवालय चौक, पंडा चौक, किसानी मोहल्ला होते हुए रामनगर पर संपन्न हुई। कलश यात्रा के दौरान जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। कलश यात्रा के दौरान माता के भक्तों ने जगह जगह पूजन अर्चन किया। सोमवार से रविवार तक 11 कुण्डीय श्री शिवशक्ति रुद्रमहायज्ञ एवं संगीतमय श्रीराम कथा महोत्सव के भव्य आयोजन हैं। बुधवार को अग्नि मंथन हवन प्रारंभ होगा। 15 दिसंबर को पूर्णाहुति, विसर्जन एवं भव्य भंडारा प्रसादी के साथ समापन होगा। यज्ञ कर्ता पागल आनंद महाराज हैं। यज्ञ में बालयोगी नागा बाबा महाराज की विशेष उपस्थिति रहेगी। श्रीराम कथा की कथा का वाचन सौम्या देवी, द्वारा किया जा रहा है। आयोजक ग्रामवासियों ने सभी क्षेत्रवासियों, श्रद्धालुओं से उपस्थिति का आग्रह किया है।"कलयुग में भगवत प्राप्ति का सरल माध्यम है श्रीराम कथा" कौड़िया में नागा महाराज, ग्रामवासियों एवं क्षेत्र वासियों द्वारा श्रीराम कथा आयोजित की जा रही है। जिसमें पहले दिन कथा वाचिका सौम्य देवी ने श्रीराम कथा का शुभारंभ करते हुए कहा कि रामकथा कलयुग में भगवत प्राप्ति का सबसे सरल साधन है, जो कानों के माध्यम से व्यक्ति के मन में प्रवेश करती है। इससे भगवान की छवि मन में बैठ जाती है और भगवत दर्शन की लालसा पैदा करती है। इसी लालसा से ही रास्ता निकाला जाता है।गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने ईश्वर की प्राप्ति के लिए सतगुरु की आवश्यकता बताई है। गुरु खोजे नहीं जाते, गुरु का दर्शन किया जाता है। उन्होंने राम नाम की महिमा बताते हुए कहा कि कलयुग में योग, यज्ञ ,जप, तप, व्रत, पूजा जैसे साधना के कठिन मार्ग संभव नहीं हैं। केवल भगवान के नाम का सुमिरन ही भवसागर से पार कर सकता है। भगवान के सहस्त्रनाम हैं और कोई भी नाम जपा जा सकता है। इसी प्रसंग में उन्होंने माता सती के अभिमान और बिन बुलाए अपने पिता के यज्ञ में जाने और भगवान शंकर का अपमान होने पर योग अग्नि के द्वारा अपने शरीर को जलाकर भस्म करने की कथा सुनाई। जिसे सुनकर श्रोताओं का हृदय द्रवित हो गया। उन्होंने भगवान शिव तथा सती के प्रसंग के माध्यम से राम कथा के महत्व का सुंदर वर्णन किया।